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लोग क्या कह रहे हैं

असली अनुभव — थोड़ी भावुकता, पूरा मज़ा।

  • प्रिया · जयपुर

    1984 में जन्म

    “बच्चों को दिखाया। बेटी चिल्लाई—'मम्मी, 1984 में सोना इतना सस्ता था?!' मैं हँस पड़ी। फिर पूरे परिवार के ग्रुप में भेज दिया।”

  • राजेश · मुंबई

    1978 में जन्म

    “ऑफिस के व्हाट्सऐप ग्रुप में डाला। अब सीनियर भी अपना जन्मदिन माँग रहे हैं। एचआर को पता नहीं चलना चाहिए… शायद।”

  • नीलम · दिल्ली

    1988 में जन्म

    “माँ को दिखाया—पहले रो पड़ीं, फिर बोलीं '1988 की ख़बरें अभी भी याद हैं!' अब माँ भी अपना MeraRoop बनवा रही हैं।”

  • सुरेश · पुणे

    1972 में जन्म

    “1972 की पेट्रोल की कीमत देखकर पापा बोले—'उस ज़माने में बाइक उँगलियों पर भर जाती थी।' मैं बोला—'पापा, वही तो देख रहे हैं!' सब हँस पड़े।”